कभी आओ…

सुनोएक कप कॉफी पिएपर इस बार मिल कर ! ऐसा लगता है कि दोस्त बने तो अर्से हो गएपर मिले हम आज भी नहींकभी आओमीलों का फासला तय करतो एक कप कॉफी पीते हुएसूरज को ढलता और चांद को निकलता देखेंगे | ऐसा लगता है मानो हम बचपन से ही एक दूसरे को जानते होकभीContinue reading “कभी आओ…”

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